

जगम्मनपुर ,जालौन। क्षेत्र के जगम्मनपुर–महटौली मार्ग पर गुढ़ा और वेरा गांव के बीच बना कुड़ार नाले का पुल एक बार फिर जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। इस समय पुल पर लगभग एक मीटर से अधिक पानी बह रहा है, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है और हजारों ग्रामीणों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है।
यमुना नदी का जलस्तर फिलहाल 105 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि खतरे का निशान 108 मीटर है। वर्ष 1996 की भयावह बाढ़ के दौरान यमुना का अधिकतम जलस्तर 112.980 मीटर तक पहुंचा था। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कभी जलस्तर उतना बढ़ा तो यह पुल करीब 25 फुट पानी के नीचे समा जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने के बाद नाले की गहराई जरूर कम हुई, लेकिन बरसात के चार महीनों में उन्हें अब भी राहत नहीं मिल पा रही है। वीरेंद्र कुमार सिंह, दया बाबू पाल, विनोद सिंह और मंगी राजपूत ने बताया कि जब पंचनद क्षेत्र की अन्य नदियों और मार्गों पर यातायात सामान्य रहता है, तब भी कुड़ार नाले का यह मार्ग डूबने से बंद हो जाता है। इसका असर गुढ़ा, वेरा, महटौली, जगम्मनपुर और आसपास के गांवों के हजारों लोगों पर पड़ता है।
करीब चार वर्ष पूर्व क्षेत्रीय विधायक मूलचंद सिंह निरंजन ने ग्रामीणों की पुरानी मांग को देखते हुए इस पुल का निर्माण कराया था। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा सही सर्वेक्षण न करने के कारण पुल अपेक्षित ऊंचाई पर नहीं बनाया गया। परिणामस्वरूप जैसे ही यमुना का जलस्तर कुछ मीटर बढ़ता है, पुल पानी में डूब जाता है और आवागमन ठप हो जाता है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब लाखों रुपये की लागत से पुल बनाया गया, तो उसका लाभ जनता को क्यों नहीं मिल रहा? उनका कहना है कि तकनीकी खामियों के कारण न केवल सरकारी धन बर्बाद हो रहा है, बल्कि आम लोगों की परेशानी भी जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों ने शासन–प्रशासन से इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।






